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5 April 2017

रामनवमी की तीर्थ यात्रा

मून बाबा मंदिर लातेहार:-

लातेहार के गुप्त पर्यटन स्थलों के रहस्योद्घाटन के सतत प्रयासों की श्रिंखला में आज प्रस्तुत है एक ऐसे स्थल का वर्णन जिसके बारे में लोग या तो बहुत कम जानते होंगे अथवा उनका ध्यान इस ओर नहीं गया होगा| यह है लातेहार के पश्चिम दिशा में गोटांग पहाड़ी के उप्पर एक गुफा में स्थित मून बाबा ( भगवान शिव ) मंदिर, जो जिला मुख्यालय से 14 km एवं निकटतम बेंदी रेलवे स्टेशन से लगभग 6 km दूर समुद्र तल से तकरीबन 900-1000 मीटर की उच्चाई पर स्थित है | यह सघन वनों, सुरम्य निर्झर, वनस्पतियों की प्राकृतिक सुगंध, पक्षियों के कलरव, अद्भुत सूर्योदय, सूर्यास्त, नदियों, कुंजों, सरोवरों से भरा एक विचित्र मायावी लोक है , जहाँ एक बार जा कर वापस लौटना कठिन है | चैत्र नवरात्रि विशेषतः रामनवमी के आसपास यहाँ स्थानीय श्रद्धालुओं को देखा जा सकता है |
कब/ कैसे जाये :- वर्षा ऋतू को छोड़कर कभी भी विशेषतः रामनवमी के आसपास प्रातःकाल यहाँ के लिए प्रस्थान कीजिए | प्रायः लोग लातेहार नगर से स्टेशन रोड, व फिर परसही रोड के द्वारा निजी वाहन से औरंगा नदी तट तक पहुच कर सामान्य स्थिति में वाहन सहित नदी पार कर बेंदी नमक ग्राम तक पहुचते हैं | वहाँ से पश्चिम की ओर जाने वाली 1 किमी लम्बी कच्ची सड़क को पकड़ कर आगे बढ़ना चाहिए रास्तें में एक दो छोटे जलाशय मिलेंगे इसके बाद एक मध्यम उच्चाई की 'बचरा' पहाड़ी आती है, जिसे पार करने में करीब 25 - 30 मिनिट लग जाता है | तत्पश्चात फौरन एक छोटी सी बरसाती नदी को पार करने पर दक्षिण दिशा को जाने वाली एक पगडंडी मिलती है, जिससे थोड़ी दूर जाने पर दाएं व बाएं ओर जाने वाले रास्तें मिलेंगे उनमे नहीं जाना है , सीधे आगे बढ़ते रहिये | यहीं से गोटांग पहाड़ी की 2-3 km लम्बी धीमी चढ़ान शुरु हो जाती है जिसका अंत इसकी तलहटी में स्थित इंद्र दावान झरना के पास पहुच कर होता है | उक्त झरना में स्नान करने के पश्चात् जलाभिषेक के लिए वहीं से पानी ले कर नंगे पाव पहाड़ी की खड़ीं चढ़ाई चढ़ते है | घने वृक्षों , लताओं, श्वेत पुष्पों, दुर्गम पथरीले मार्गों , पशुओं पक्षियों, सर्पों मनमोहत प्राकृतक सुगंधों व सूर्योदय के शानदार नजारों का आनंद लेते हुए करीब 45 मिनिट में गंतव्य गुफा तक पंहुचा जा सकता है | झारखण्ड के अमरनाथ में आपका स्वागत है | वाह क्या दृश्य है| जरा चारो ओर दृष्टिपात तो कीजिये कैसे सिर के उप्पर वृक्षों की डालियां व महाबीरी ध्वज लहरा रहें हैं दूर हरी घाटियों में औरंगा नदी किस प्रकार प्रवाहित हो रही है | अब सीधे पवित्र कन्दरा में प्रवेश करें यही मून बाबा का मंदिर है, जो करीब 10 फिट लम्बा , 7 फिट चौड़ा एवं 8 फिट उच्चा है | गर्भगृह में तीन प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं जिनका दर्शन व फल ,फूल अदि विभिन्न द्रव्यों द्वारा पूजन करने के लिए श्रद्धालु पंक्तिबद्ध हो कर अनुशासित रूप से आगे बढ़ते हैं | अपनी पूजा समाप्त कर मंदिर के प्रांगन में कुछ समय मानसिक शांति के लिए विश्राम करते हुए बिताना चाहिए|
फिर चाहें तो 10-15 मिनिट की खड़ी चढ़ाई चढ़ कर पहाड़ी के शिखर पर पहुच सकतें हैं | वहां से चारो ओर के विहंगम दृश्य का साक्षात्कार यादगार रहेगा | यह पुर्णतः अनछुआ प्रदेश है यहाँ आग , प्लास्टिक तथा अन्य अप्सिस्ट पदार्थों द्वारा प्रदूषण फैलाने के जघन्य अपराध से बचें | अब वापसी का अभियान आरंभ होता है, याद रहे पहाड़ी से निच्चे उतरना चढ़ने से अधिक चुनौती पूर्ण होता है, अत्यंत सावधान रहना अनिवार्य है | यात्रा के समस्त अनुभवों को कैमरे में कैद करना ठीक रहेगा ....












24 December 2016

दलमा माई देवी स्थल (गुफा)
         यहाँ दलमा देवी का गुफा हैं, जिसमें स्थानीय ग्रामीण शिव रात्रि पूजा, सावन पूजा एवं आशाढ़ी पूजा करने हेतु इकठा होते हैं। ऐसा विष्वास किया जाता हैं कि काफी पहले एक आदिवासी जोड़ा अपने 12 से 14 वर्शीय पुत्री, जिसका नाम दलमा था गुफा के पास जलावन इकठा कर रहे थे। इसी क्रम में उत्सुकतावष वे गुफा को देखने हेतु प्रवेष किए। जब वे गुफा से बाहर आए तो अपनी कुलहाड़ी जो गुफा में ही छुट गई थी, को लाने के लिए वे अपनी पुत्री दलमा को भेजे। पुत्री को लौेटने में देर होने पर वे वहाँ पुन गए एवं देखे की गुफा के अन्दर कुछ यात्री बैठ कर भोजन कर रहे थे एवं उनकी पुत्री दलमा उनके सामने खड़ी थी। दलमा के माता-पिता जब पुत्री को वापस आने के लिए पुकारे तो उसी समय गुफा बंद हो गया। काफी प्रयास करने पर भी वे गुफा को खोल नहीं सके। इस प्रकार उनकी पुत्री दलमा उस गुफा में ही रह गई, जिसके नाम पर उस पहाड़ी का नाम दलमा पड़ा तथा गुफा का नाम दलमा माई मंदिर के नाम से प्रसिद्व हुआ।


लावापानी जलप्रपात, लोहरदगा.

झारखण्ड में अनेक ऐसे अद्भुत लेकिन अज्ञात पर्यटन स्थल हैं ,जिन्हें विश्वपटल पर लाये जाने पर राज्य में पर्यटन का आशातीत विकास निस्च...