10 December 2017

सुरलोक मई 'सुर्कई घाघरी'

सुरलोक मई 'सुर्कई घाघरी' :- लातेहार अनेका अनेक अद्भुत् व आश्चर्यजनक पर्यटन स्थलों वाला क्षेत्र है| यहाँ के अज्ञात व अनछुए पर्यटन स्थलों के खोज की शृंखला में अब प्रस्तुत है 'सुर्कई घाघरी' नामक एक अद्वितीय जलप्रपात का संक्षिप्त विवरण |
यह जलप्रपात लातेहार जिले के महुआडाड प्रखंड से लगभग 13 कि०मी० की दुरी पर महुआडाड-ओर्सा मार्ग पर कुंजी पत्थर नामक स्थान से 1.5 किमी दूर काबरा पाट के सघन व एकांत वन में अवस्थित है |
लातेहार का सुर्कई घाघरी जलप्रपात एक ही धारा में गिरने वाले जल प्रपातों में अत्यंत महत्वपूर्ण है| इसकी धारा अनुमानतः 250-300 फिट की उच्चाई से गिर कर एक छोटे जलाशय का निर्माण करती हुई आगे नदी के रूप में बहती हुई बुढा नदी में मिल जाती है| उच्चाई व सोन्दर्य के दृष्टिकोण से लोध जलप्रपात के पश्चात इस निर्झर का क्षेत्र में संभवतः दूसरा स्थान है|
साल, आसन, अर्जुन, करम, करंज, सिरिस जैसे काष्ठिये तथा अन्य फलदार वृक्षों, जंगली पुष्पों व औषधीय वनस्पतियों के द्वरा इस जलप्रपात के चारो ओर एक सुरम्य मिश्रित वन का निर्माण होता है, जहाँ बंदर, जंगली सूअर, भालू, भेड़िया, नेवला, हाथी जैसे पशु तथा मोर, महुकल आदि विभिन्न प्रकार की ज्ञाताज्ञात प्रजातियों के पक्षियों के कलरव एक दुर्लभ जैव-विविधता पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र का दृश्य प्रस्तुत करते हैं |
दूर से ही झरने की आवाज सुनाई देने लगती है, जो गंतव्य तक जाने के रोमांच व उत्साह को बढ़ाने वाली होती है | फिर वहां पहुच कर श्वेत प्रकाशमय दूधिया जलराशि युक्त जलप्रपात में स्नान कर सम्पूर्ण शारीरिक व मानसिक थकान मिटा लेने का विधान है |
दुखद आशचर्य की बात है की ऐसे अलौकिक स्थल के बारे में देशवासी अथवा राज्यवासी तो क्या स्थानीय जनता भी ठीक से परिचित नहीं हैं| इसके विभिन्न कारणों में से एक कारण यहाँ पर अवसंरचनात्मक विकास का नामोनिशान भी नहीं होना है | कम से कम पर्यटकों के लिए एक सड़क, यात्री पड़ाव , दूरसंचार आदि न्यूनतम सुविधाएँ तो उपलब्ध होनी ही चाहिए| इनके अभाव में भी इस क्षेत्र के व्यापक प्रचार -प्रसार के लिए लातेहार टूरिज्म वर्षों से सतत समर्पित भाव से सक्रिय रहा है|
सुर्कई घाघरी जल प्रपात का आर्थिक महत्त्व बहुत अधिक है, बस थोड़ी सी जन जागरूकता एवम् सरकार के इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है फिर राज्य को इसके पर्यटन विकास से होने वाली आय तो बहुत छोटी बात है , इस अद्वितीय पर्यटन स्थल को विश्व के मानचित्र पर आने से कोई नहीं रोक सकता |
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सामान्य सूचनाएं:-
प्रमुख स्थलों से दुरी :- रांची 200 KM
लातेहार 124 KM
नेतरहाट:- 55 KM
महुआडाड:-13 KM
कैसे जाएँ :-बस अथवा निजी वाहन द्वारा महुआडाड पहुच कर वहां से महुआडाड - ओर्सापाट पथ के रास्तें मेढ़ारी गश्ती चौकी पहुंचें, फिर वहाँ से एक घाटी पार कर कुंजी पत्थर पहुंचें, वहां से बाई ओर करीब डेढ़ कि०मी० पर सुर्कई घाघरी जल प्रपात स्थित है |
कब जाएँ :- मुख्यतः सितम्बर से अप्रैल के बीच|
कहाँ ठहरें :- डाक बंगला महुआडाड |
संपर्क :-latehartourism@gmail.com.




23 April 2017


मिर्चिया जलप्रपात :-पलामू वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत यह जलप्रपात गारू से 3 कि.मी. की दूरी पर स्थित है । यह स्थान बहुत ही मनोरम एवं एकांत में है, जहां झरने की कलकल ध्वनि पहाड़ से बहती हुई सुनाई देती है । यह जलप्रपात पर्यटकों के लिए पिकनिक मनाने के लिए एक उत्तम स्थान है। 

Mirchaiya waterfall:- Mirchaiya waterfall is located 3 km from Garu block of Latehar district. It is situated within the Palamu tiger reserve area. The mirchiya Falls is small comparatively to other waterfalls in Jharkhand, but the beauty and location does place it among the best. The ideal time to visit this place is during the monsoon season.


5 April 2017

रामनवमी की तीर्थ यात्रा

मून बाबा मंदिर लातेहार:-

लातेहार के गुप्त पर्यटन स्थलों के रहस्योद्घाटन के सतत प्रयासों की श्रिंखला में आज प्रस्तुत है एक ऐसे स्थल का वर्णन जिसके बारे में लोग या तो बहुत कम जानते होंगे अथवा उनका ध्यान इस ओर नहीं गया होगा| यह है लातेहार के पश्चिम दिशा में गोटांग पहाड़ी के उप्पर एक गुफा में स्थित मून बाबा ( भगवान शिव ) मंदिर, जो जिला मुख्यालय से 14 km एवं निकटतम बेंदी रेलवे स्टेशन से लगभग 6 km दूर समुद्र तल से तकरीबन 900-1000 मीटर की उच्चाई पर स्थित है | यह सघन वनों, सुरम्य निर्झर, वनस्पतियों की प्राकृतिक सुगंध, पक्षियों के कलरव, अद्भुत सूर्योदय, सूर्यास्त, नदियों, कुंजों, सरोवरों से भरा एक विचित्र मायावी लोक है , जहाँ एक बार जा कर वापस लौटना कठिन है | चैत्र नवरात्रि विशेषतः रामनवमी के आसपास यहाँ स्थानीय श्रद्धालुओं को देखा जा सकता है |
कब/ कैसे जाये :- वर्षा ऋतू को छोड़कर कभी भी विशेषतः रामनवमी के आसपास प्रातःकाल यहाँ के लिए प्रस्थान कीजिए | प्रायः लोग लातेहार नगर से स्टेशन रोड, व फिर परसही रोड के द्वारा निजी वाहन से औरंगा नदी तट तक पहुच कर सामान्य स्थिति में वाहन सहित नदी पार कर बेंदी नमक ग्राम तक पहुचते हैं | वहाँ से पश्चिम की ओर जाने वाली 1 किमी लम्बी कच्ची सड़क को पकड़ कर आगे बढ़ना चाहिए रास्तें में एक दो छोटे जलाशय मिलेंगे इसके बाद एक मध्यम उच्चाई की 'बचरा' पहाड़ी आती है, जिसे पार करने में करीब 25 - 30 मिनिट लग जाता है | तत्पश्चात फौरन एक छोटी सी बरसाती नदी को पार करने पर दक्षिण दिशा को जाने वाली एक पगडंडी मिलती है, जिससे थोड़ी दूर जाने पर दाएं व बाएं ओर जाने वाले रास्तें मिलेंगे उनमे नहीं जाना है , सीधे आगे बढ़ते रहिये | यहीं से गोटांग पहाड़ी की 2-3 km लम्बी धीमी चढ़ान शुरु हो जाती है जिसका अंत इसकी तलहटी में स्थित इंद्र दावान झरना के पास पहुच कर होता है | उक्त झरना में स्नान करने के पश्चात् जलाभिषेक के लिए वहीं से पानी ले कर नंगे पाव पहाड़ी की खड़ीं चढ़ाई चढ़ते है | घने वृक्षों , लताओं, श्वेत पुष्पों, दुर्गम पथरीले मार्गों , पशुओं पक्षियों, सर्पों मनमोहत प्राकृतक सुगंधों व सूर्योदय के शानदार नजारों का आनंद लेते हुए करीब 45 मिनिट में गंतव्य गुफा तक पंहुचा जा सकता है | झारखण्ड के अमरनाथ में आपका स्वागत है | वाह क्या दृश्य है| जरा चारो ओर दृष्टिपात तो कीजिये कैसे सिर के उप्पर वृक्षों की डालियां व महाबीरी ध्वज लहरा रहें हैं दूर हरी घाटियों में औरंगा नदी किस प्रकार प्रवाहित हो रही है | अब सीधे पवित्र कन्दरा में प्रवेश करें यही मून बाबा का मंदिर है, जो करीब 10 फिट लम्बा , 7 फिट चौड़ा एवं 8 फिट उच्चा है | गर्भगृह में तीन प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं जिनका दर्शन व फल ,फूल अदि विभिन्न द्रव्यों द्वारा पूजन करने के लिए श्रद्धालु पंक्तिबद्ध हो कर अनुशासित रूप से आगे बढ़ते हैं | अपनी पूजा समाप्त कर मंदिर के प्रांगन में कुछ समय मानसिक शांति के लिए विश्राम करते हुए बिताना चाहिए|
फिर चाहें तो 10-15 मिनिट की खड़ी चढ़ाई चढ़ कर पहाड़ी के शिखर पर पहुच सकतें हैं | वहां से चारो ओर के विहंगम दृश्य का साक्षात्कार यादगार रहेगा | यह पुर्णतः अनछुआ प्रदेश है यहाँ आग , प्लास्टिक तथा अन्य अप्सिस्ट पदार्थों द्वारा प्रदूषण फैलाने के जघन्य अपराध से बचें | अब वापसी का अभियान आरंभ होता है, याद रहे पहाड़ी से निच्चे उतरना चढ़ने से अधिक चुनौती पूर्ण होता है, अत्यंत सावधान रहना अनिवार्य है | यात्रा के समस्त अनुभवों को कैमरे में कैद करना ठीक रहेगा ....












2 April 2017

Latehar district


Latehar district came into existence on 4th April 2001. Previously It was a part of Palamu District of Jharkhand State. it is situated between 84°28'. East latitude 23°44' north latitude and is about 105 km North West of Ranchi and 65 km from Medininagar (Daltonganj).The geographical area of the district is 3651.59 km². The elevation of the area is around 375m. to 550m. but its highest point is approximately 1,127 meters above mean sea level at its main tourist destination Netarhat.
Latehar District is Known For voluptuous greenery, waterfalls and multifarious culture . Nature has been Extremely generous to Latehar. It is an extremely pleasant place to visit for tourism. Hypnotizing Hills, Betla national park ,wolf sanctuary, waterfalls, temple, festival, forts, rivers and countless scenic sites make Latehar an ideal destination for tourist.
How to reach :- Ranchi is the nearest airport from where Latehar is 110 km. Bus services are also available from Ranchi ITI Bus stand.
Transport - Four wheelers can be hired from travel agencies for sigh seeing.

24 February 2017

Upper Ghaghri waterfalls, Latehar

Upper Ghaghri waterfalls:- It is  a small waterfall, situated 5 km from Netarhat. It is in the Latehar district of Jharkhand.  .There is a rock that divides the cascade into two streams. The falls are surrounded by lush greenery which makes it a perfect location to have a family picnic on the weekend offering the family a different screen from the usual. The falls are best during the monsoons when the river is flooded.            

अपर घाघरी जलप्रपात :-   यह जलप्रपात नेतरहाट से 5 कि.मी की दूरी पर घाघरी नदी पर स्थित है| इस  जलप्रपात के आसपास घने वन विद्यमान है, जो कि उसकी प्राकृतिक सौंदर्यता को और बढ़ा देती है। यह पर्यटकों के पिकनिक मनाने के लिए एक उत्तम स्थान है।  मानसून के दौरान इसका प्राकृतिक सौंदर्य और भी निखर जाता है






Sugga Bandh Waterfall,Latehar

सुग्गा बांध जलप्रपात :- यह जलप्रपात महुआडांड़ से 28 किमी पीछे और बारेसांड़ से सात किमी आगे  बेतला- महुआडांड़  (SH-9) सड़क से 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अपने अंदर असीम खूबसूरती समेटे सुग्गा बांध के चारो तरफ ऊंची पहाड़ियों का दृश्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां 80 फीट की ऊंचाई से पानी की धारा चट्टान पर गिरती है। पानी की धारा के कारण चट्टान एक अलग शक्ल में नजर आता है, जैसे मानो इन पत्थरों में नक्काशी की गई हो। बेतला नेशनल पार्क से इसकी दूरी लगभग 57 किमी की है। यहां निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। 

Sugga Bandh Waterfall:-  It is located on the route of Betla to Netarhat. Suggha band is surrounded by hills which makes it different from other tourist destinations. The cascade falls from the height of 80 feet on the rock. Sugga bandh is approximately 57 kms away from Betla National Park. You can come here by your personal vehicle also.





22 January 2017

Betla National Park

Almost 170 kms from Ranchi and surrounded by lush green forests, hills, valleys and waterfalls, Betla is a serene tribal village located in the Latehar District of Jharkhand bordering the jungle. It’s the main tourism centre of the Palamu Tiger Reserve. Chital deer and bison can be seen grazing in the grasslands. Elephants are available for tourist ride. Mahouts lead their elephants into the forest area. Tourists can enjoy watching wild elephants and other animals on elephant back. A baby elephant, Rakhi who got separated from her herd is also a major attraction for tourists. The guided jeep safari organized in the Belta National Park to spot wildlife and birds is truly exciting. There are five watchtowers in the sanctuary, which offer unobstructed views of animals. 

बेतला राष्ट्रीय उद्यान :- लातेहार जिले में स्थित बेतला राष्ट्रीय उद्यान झारखंड का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है । यह झारखंड की राजधानी रांची से करीब 170 किलोमीटर दूर स्थित है।  इसकी स्थापना सितम्बर , 1986 ई. में की गई | यह 231.67 वर्ग किमी में फैला हुआ है | विश्व में बाघों की सर्वप्रथम  गणना 1932 ई में यहीं की गई थी | भारत सरकार 1973 ई से यहाँ ब्याघ्र परियोगना चला रही है | इस राष्ट्रीय उद्यान में हाथी, बाघ , चीतल , सांभर , नीलगाय , भालू ,बंदर, मोर जंगली सूअर अदि अनके वन्य  प्राणी के साथ- साथ नाना प्रकार के ग्यात अज्ञात  वनस्पति, जडी-बुटी, अर्थात परिस्थिकतंत्र को सुरक्षित रखने वाले सम्पूर्ण फ़्लोरा-फौना पाए जाते है | यहाँ पर्यटकों के निवासार्थ एक आकार्सक ट्री हाउस है | विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए इस उद्यान में एक नेचर इंटरप्रेटेशन सेंटर है जिसमे वन्य प्राणियों का एक  संग्रहालय पुस्तकालय, और मीटिंग हॉल है जो शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी है | 





Pic :- Saikat Chaterjee

लावापानी जलप्रपात, लोहरदगा.

झारखण्ड में अनेक ऐसे अद्भुत लेकिन अज्ञात पर्यटन स्थल हैं ,जिन्हें विश्वपटल पर लाये जाने पर राज्य में पर्यटन का आशातीत विकास निस्च...